भारत

भारत एक अपने आप में सहनशील देश है।
आपको ज्ञात होना चाहिए कि 1971 के युध्द में पाकिस्तान को मुँह की खानी पड़ी थी, फिर भी वह आज तक नही सुधर पाया।
उस समय के भारत पाकिस्तान युद्ध में भारत के सैनिकों ने पाकिस्तान के अंदर तक दाखिल हो गए थे, और भारत के कब्जे में पाकिस्तान की लगभग 15000 वर्ग किलोमीटर तक की जमीन भारत के कब्जे में हो चुकी थी।
साथ ही पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को हथियार डाल देने पर मजबूर कर दिया और उन सभी को भारत ने अपने कब्जे में कर लिया।
बात यहाँ तक तो ठीक थी पर जब पाकिस्तान के हुक्मरानो ने अपनी हार स्वीकार कर ली। तबकी भारत के गादीपतियों ने ये सोचा कि पाकिस्तान अपने सैनिक छुड़वाने का प्रयास अवश्य करेगा और तब हम उन्हें अपने सैनिक वापस कर देंगे लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा नही किया।
उसने भारत से अपनी जमीन को वापस करने की गुहार लगाई और और भारत ने अपनी सेना को पाकिस्तान का वो 15000 किलोमीटर पर जो कब्जा था वहाँ से हटकर उसे अपनी जमीन वापस दे दी ये सोचकर कर कि पाकिस्तान उसके 90000 सैनिक छुड़वाने की कोशिश करेगा लेकिन उसने ऐसा नही करके अपनी जमीन वापस ले ली।

अब अन्तर्राष्ट्रीय नियम के अनुसार कोई भी देश यदि दुश्मन देश के सैनिक आत्मसमर्पण कर दे तो उन्हें अधिक समय तक बन्दी बनाकर रखा नहीं जा सकता यह बात पाकिस्तान जानता था,और भारत यहाँ पर यह भूल कर बैठा।
भारत ने जमीन तो वापस की ही साथ ही आत्मसमर्पित सैनिक भी वापस करने पड़े ।
ये भारत के तत्कालीन सत्ताधीशों की सबसे बड़ी भूल थी।
अब भारत को इस युद्ध से क्या लाभ हुआ….?
कुछ भी नहीं… Nothing

यदि उस समय भारत ने पाकिस्तान की 15000 वर्ग किलोमीटर की जमीन अपने पास रखी होती तो आज वहां पर भारत का एक और राज्य होता।
और पाकिस्तान अपनी हैसियत में रहता।

15000 squre kilomitar का एरिया मतलब…….
अपनी राजधानी दिल्ली जैसे 10 शहरों को बसाया जा सकता था।

और इसके बाद शिमला समझौता हुआ जिसमें पाकिस्तान की तरफ से भुट्टो जुल्फिकार अली और भारत की तरफ से इंदिरा गांधी शामिल हुए।
इस समझौते में ये लिखा गया कि कश्मीर मुद्दा कभी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नही ले जाया जाएगा इसे आपसी बातचित से सुलझाऐंगे।

आलोचक
आलोचक कहते हैं कि ये समझौता भारत का पाकिस्तान के सामने समर्पण था, क्योंकि भारत ने युद्ध के दौरान पाकिस्तान के जिन राज्यो पर कब्जा किया था उन्हें अब छोड़ना पड़ा।
एक तरह से लाभ भी हुआ कि इस मामले को अंतरराष्ट्रीय रूप न देकर आपस में ही सुलझाया जाएगा।

जय भारत

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